अमित सेन
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भोपाल। माह ए रमजान में मस्जिदों में होने वाली बिजली की फिजूलखर्ची रोकी जाना चाहिए। मोहल्लों में होने वाली सजावट भी गैर जरूरी है, इस पर भी पाबंदी लगाई जाए। मस्जिदों के खर्च की बिजली की उपलब्धता सौर ऊर्जा से किया जाए तो यह एक बेहतर विकल्प बन सकता है।
काजी ए शहर सैयद मुश्ताक अली नदवी ने यह अपील राजधानी के बाशिंदों से की है। दारुल कजा और दारुल इफ्ता के बाकी मेंबर उलेमाओं ने भी इस बात की तस्दीक की है। उलेमाओं ने कहा कि माह ए रमजान में यह देखने में आता है कि अनावश्यक बिजली इस्तेमाल की जाती है, जो गैर जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस मुबारक महीने के दौरान मोहल्लों और बाजारों में भी बहुतायत रोशनी की जाती है। उलेमाओं ने कहा कि कुरान में फिजूलखर्ची करने वाले को शैतान का भाई करार दिया गया है। इसलिए इन हालात से बचें और अल्लाह और उसके पैगम्बर के बताए रास्ते पर चलकर नेक इंसान होने का सुबूत पेश करें। उन्होंने कहा कि ऐसा करके वे समाज में भी एक बेहतर संदेश देने में कामयाब होंगे। शहर मुफ्ती अब्दुल कलाम खान कासमी, काजी सैयद बाबर हुसैन, मुफ्ती रईस अहमद खान, मुफ्ती जसीम दाद, काजी शराफत रहमानी, काजी सैयद अली कदर हुसैनी ने शहर काजी के इस ऐलान और अपील पर सहमति जताई है।
करें सौर ऊर्जा का उपयोग
शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि विभिन्न मस्जिदों की प्रबंधन कमेटी को इस बात पर विचार करना चाहिए कि मस्जिदों में सोलर पैनल स्थापित कराएं। इससे मस्जिद की जरूरत की बिजली प्राकृतिक तरीकों से हासिल हो सकती है। साथ ही बिजली बिल पर होने वाली बड़ी राशि की बचत भी होगी।