
निर्मोही अखाड़ा राम मंदिर की लड़ाई शुरू से लड़ते आये हैं वे ही पूजा करते आये हैं फिर उन्हें हटा कर VHP ने राम मंदिर पर क़ब्ज़ा क्यों कर लिया? ८०-९० के दशक में VHP ने जो ₹१४०० करोड़ मंदिर निर्माण में चंदा उगाया था वह कहाँ गया? नरेंद्र मोदी जी वही VHP के करता धर्ता चंपत राय ने न्यास द्वारा उगाये चंदा से ज़मीन ख़रीदी घोटाले करोड़ों का घपला किया क्या आपने क्या उनसे पूछा? IT अधिकारी ने नोटिस दिया था उसे बर्खास्त कर दिया गया था।
हिंदुओं के लिए सनातन धर्म के सबसे सम्मानित प्रमाणित गादी ४ शंकराचार्यों की होती है। इनमें आज सब से वरिष्ठ व शास्त्रों के ज्ञाता पुरी के शंकराचार्य श्री निश्चलानंद सरस्वती महाराज हैं। उनके अनुसार निर्माणाधीन मंदिरों में मूर्ति की प्रतिष्ठा कभी नहीं होती है। राम मंदिर निर्माण के लिए अदालत में लड़ाई VHP ने नहीं लड़ी पर उसे जोशीमठ व द्वारिका के शंकराचार्य स्व स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने और वर्तमान जोशीमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरान्द जी महाराज ने लड़ी। पूर्व प्रधानमंत्री स्व नरसिम्हां राव जी बाबरी मस्जिद राम मंदिर निर्माण को केवल धर्म गुरुओं को सौंपना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने रामालय न्यास का गठन कर चारों शंकराचार्य व रामानंदी संप्रदाय के प्रमुख स्वामी रामनरेशाचार्य जी को उसका सदस्य मनोनीत किया व उसका पंजीयन कर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज को उसका अध्यक्ष बनाया गया। उच्चतम अदालत के फ़ैसले के बाद केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण हेतु न्यास बनाना था। लेकिन @narendramodi जी ने हमारे धर्मगुरुओं के रामालय न्यास के होते हुए भी नये न्यास का गठन किया और उसे VHP को सौंप दिया। क्या यह उचित था? क्या यह न्याय संगत था? क्या यह हमारे धर्मगुरुओं का अपमान नहीं था? @RSSorg @VHPDigital के लिए धर्म आस्था का प्रतीक नहीं है। उनका शुरू से यह प्रयास रहा है कि किसी प्रकार सनातन धर्म के मंदिर मठ आश्रम भूमि व चड़ौत्री पर राजनीतिक स्वार्थ के लिये क़ब्ज़ा कर उपयोग किया जाये।क्या पूर्व में रथ यात्रा के समय VHP ने मंदिर निर्माण के लिए लगभग ₹१४०० करोड़ का चंदा नहीं उगाया था? वो कहाँ गया? अब शासकीय न्यास में फिर चंदा लिया गया और श्रद्धालुओं ने मुक्त हस्त से फिर चंदा दिया। क्या VHP संचालित न्यास ने अयोध्या जी में भूमि ख़रीद में घोटाला नहीं किया? क्या उसकी जाँच नहीं होना चाहिए? धर्म हमारे लिए हमारी आस्था है @RSSorg @VHPDigital @BJP4India के लिए सत्ता संपत्ति चंदा हथियाने का माध्यम है।

कांग्रेस @INCIndia एक पार्टी के तौर पर सभी धर्मों का आदर करती है, न केवल इस देश के बल्कि पूरे विश्व में प्रचलित हर धर्म का । व्यक्तिगत तौर पर मैं हिंदू हूं जन्म और निष्ठा से और सनातन धर्म में मेरी अटूट आस्था है ।चारों शंकराचार्य सनातन धर्म के संवाहक और शीर्ष हैं ।उनके आदेश की अवहेलना कर राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा करना धर्म विरुद्ध कृत्य है,राजनीतिक प्रयोग है। मैं स्वयं और कांग्रेस जन इसलिए वहां नहीं जाएंगे क्योंकि हम हमारे सनातन गुरु और आदर्श शंकराचार्य धर्म गुरुओं की अवहेलना नहीं कर सकते, और न ही सनातन धर्म के सच्चे अनुयायियों की भावना पर आघात। भारतीय जनता पार्टी @BJP4India का धर्म के विरुद्ध आचरण अधर्म ही है।

