सुबह, दोपहर, और फिर शाम सच में दवा सी जरुरी
आपका अनुज अमित सेन
8085661177
भोपाल शहर भी अपनी ही कुछ खासियतों के लिए मशहूर है जैसे झीलों की नगरी भोपाल, तालाबों का शहर भोपाल, अनगिनत पार्को का शहर भोपाल, भोपालियोँ का शहर भोपाल, पान के शौकीनों का शहर भोपाल, रातों को जागने वाला शहर भोपाल और सबसे ज्यादा और अहम जो है, वो है चाय की चुस्कियों का शहर भोपाल…
आप किसी भी भोपाली को पूछ लो भाई चाय हो जाए फिर मना करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता और चाय के भी ऐसे कई प्रकार जो सिर्फ भोपाल में ही मिलते हैं!
हम बात कर रहे थे भोपाल की और वहीं से याद आता है एक ऐसा किस्सा जो बहुत ही यादगार है और आपके लिए सुनना बेहद जरुरी भी है। राजधानी भोपाल के एक वो वरिष्ठ पत्रकार, जिनके बारे में मैंने कई लोगों से सुना और जाना था और भोपाल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के कहने पर मेरी उनकी मुलाक़ात हुई !
उनसे मेरी पहली मुलाक़ात पुराने भोपाल के एक रेस्टोरेंट में हुई। वहीं आते ही बातें जय श्री महाँकाल से शुरू होकर एक दूसरे को जानने तक पहुंची और चाय की अंतिम चुस्कियों पर आकर खत्म हों गई। वो पहली मुलाक़ात भी बहुत यादगार थीं और उस पहली मुलाक़ात से शुरू हुई दोस्ती दिन ब दिन और गहरी होती गई और मेरी पत्रकारिता भी उनके मार्गदर्शन में निरंतर निखरती गई!
सिखाने की ललक इतनी की अ से ज्ञानी बना दें, मगर सीखने वाले की कैफ़ीयत अनुसार ही वो ग्रहण कर सकता है। फिर भी उन्होंने पत्रकार होने के साथ-साथ एक अच्छा इंसान भी बना दिया!
सिखाया तो सिर्फ इतना कि “ऐसी कोई समस्या नहीं बेटा, जो चाय की चुस्कियों से बड़ी हो जाए” इसलिए जीवन में समस्याओं से डरना मत, झिझकना मत, बस लड़ना आना चाहिए… समस्या चाहे जितनी भी बड़ी हों!
आज उनके ही ख़ास जन्मदिन के अवसर पर उनको मेरी और से उनको समर्पित श्री भारत भूषण विश्वकर्मा जी को जन्मदिवस की अनंत-अनंत शुभकामनाएं एवं ढेरों बधाई!
बाबा महाकाल महाराज की दया आप पर हमेशा बनी रहे… आप हमेशा स्वस्थ एवं मस्त बने रहें… !
वहीं पहली मुलाक़ात से शुरू हुई दोस्ती आज भी _चाय_मेरा_इश्क़_ की तरह बरकरार है!