खान आशु
भोपाल। पिछले चुनावों का इतिहास देखा जाए तो प्रदेश के कुल वोट से महज 17 फीसदी वोटों पर असर डालने के लिए यहां तीसरे मोर्चे की मौजूदगी बनती रही है। अपने वर्चस्व को बरकरार रखने की जुगत में लगीं यह छोटी पार्टियां असफलता से न तो विचलित हुईं और न ही हार का मलाल करके घर बैठी। सिलसिला अब भी जारी है। भाजपा और कांग्रेस की दमदारी वाले इस प्रदेश में छोटे दलों की आवाजाही अब भी बरकरार है। इन्हीं कोशिशों में अब एक नए दल ने अपनी जमावट का सिलसिला शुरू हो गया है। यह दल प्रदेश के अल्पसंख्यक समुदाय के उन वोटों में सेंध लगने के हालात बन सकते हैं, जो भाजपा से ठुकराया हुआ है और कांग्रेस से ठगाया हुआ।
मप्र की राजधानी भोपाल में पिछले कई दिनों से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग पार्टी (IUML) की सरसराहट महसूस की जा रही है। अब यह पार्टी विधिवत रूप से अपनी प्रदेश आमद का ऐलान करने वाली है। सूत्रों का कहना है कि IUML 10 नवंबर को एक बड़ी बैठक भोपाल में करने वाली है। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जावेद खान करेंगे। इस दौरान ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) से जुड़े रही एक बड़ी टीम IUML का दामन थामकर नई पारी शुरू करने वाली है।
कोशिशें कई की हुईं
प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों का वर्चस्व शुरुआत से ही रहा है। यूपी के जुड़े प्रदेश के कई जिलों रीवा, सतना, छतरपुर, सागर आदि में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी ने अपना खासा दखल बना भी लिया है। इन जिलों में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने भी अपने कदम रखना शुरू किए थे, लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाई। इधर हैदराबाद से महाराष्ट्र के रास्ते मप्र पहुंची ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने प्रदेश के मुस्लिम बहुल जिलों में अपनी जमीन पुख्ता करना शुरू कर दिया है। बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन और इंदौर जिलों में यह पार्टी निकाय चुनावों में अपनी मौजूदगी दर्ज करवा चुकी है। इसके अलावा उज्जैन, रतलाम, देवास, शाजापुर, भोपाल, विदिशा, सतना जैसे जिलों में भी AIMIM के कदम बढ़ चुके हैं। इसके अलावा केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने भी प्रदेश में अपनी पहचान बनाने में सफलता हासिल कर ही ली है।
मुस्लिम वोटों का आंकड़ा बड़ा
कांग्रेस के हाथों की कठपुतली बने रहे मुस्लिम समुदाय ने पिछले कुछ चुनावों से भाजपा का नाम लेना शुरू किया है। कांग्रेस से मिली बेरुखी और दोगलाई के बाद मुस्लिम समुदाय के पास तीसरा विकल्प न होना उसकी मजबूरी है, वरना प्रदेश में अपनी बड़ी मौजूदगी है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश के कई जिलों के कुल वोट का 10 से 12 प्रतिशत वोट मुस्लिम समुदाय का है। इंदौर, उज्जैन, भोपाल संभाग समेत कई जिलों में मुस्लिम वोट प्रतिशत इतना है कि यहां किसी भी पार्टी या प्रत्याशी की जीत या हार की ताकत इस समुदाय के पास है।
कितने दल मौजूद
=समाजवादी पार्टी (सपा)
=बहुजन समाजवाद पार्टी (बसपा)
=गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा)
=आम आदमी पार्टी
=ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM)
=इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग पार्टी (IUML)(नई आमद)
भोपाल से खान आशु की रिपोर्ट