भोपाल। कभी वे भुट्टे खाने के लिए काफिला सड़क किनारे रुकवा लेते हैं…. तो कभी किसी चाय की रेहड़ी वाली से जिद करके खुद चाय बनाने लगते हैं….! व्यस्त दौरे के बीच हादसाग्रस्त किसी साधारण परिवार के लिए भी वे चिंतित दिखाई दे जाते हैं…! नायक बनकर जनता के सीएम डॉ मोहन यादव सर्दी की व्यवस्थाएं देखने रैन बसेरे का चक्कर भी लगाने से गुरेज नहीं करते। और कभी कैंसर अस्पताल में आधी रात औचक रूप से पहुंचकर मरीजों की कुशलक्षेम भी जान आते हैं।

एक साल पहले प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा चौथी पंक्ति में बैठे एक गैर सियासी परिवार के व्यक्ति के कंधों पर प्रदेश की बागडोर सौंप दिया जाना शायद इसी दूरदर्शिता का हिस्सा था। डॉ मोहन यादव ने सालभर में खुद को साबित कर दिखाया। जन सरोकार की योजनाओं से लेकर प्रदेश विकास की नई तहरीर लिखने में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वास को बार बार मजबूत किया है।

सरल, सहज, सुलभ कहलाने वाले लोकनायक डॉ मोहन यादव का यही आसान रूप मंगलवार शाम फिर परिलक्षित हुआ। जब अपने शासकीय दौरे से लौटते हुए उन्होंने नर्मदापुरम से भोपाल का सफर सरकारी लवाजमे की बजाए साधारण यात्री के तौर पर करने का ऐलान किया। इंटरसिटी एक्सप्रेस में जब यह यात्रा शुरू हुई तो ट्रेन में मौजूद यात्रियों में आश्चर्य मिश्रित खुशी पसर गई। सीएम डॉ मोहन यादव साधारण यात्री की तरह आमजन के साथ सीट शेयर करते नजर आए। इस स्थिति ने लोगों में हौंसला भरा तो कोई अपने मासूम बच्चे को उनके पास लेकर आने की हिम्मत जुटाता दिखाई दिया तो कोई स्टूडेंट उनकी बगल की सीट पर सुकून से आ बैठी। कुछ युवाओं ने अपने नायक के साथ सेल्फी लेने भी हिचकिचाहट महसूस नहीं की। रानी कमलापति स्टेशन पर जब यह सफर पूरा हुआ तो प्लेटफार्म पर मौजूद लोगों ने भी खुशियों भरी नजरों से अपने जननेता का साथ खड़े होकर स्वागत किया।


